प्रवचन क्लिप टेक्स्ट

राम, रामनाम मुख में आए, सदा ही रहे, और अंतिम पल में तो आए ही आए। अंतिम पल यानी केवल मृत्यु के समय नहीं, प्रत्येक कार्य सफल संपूर्ण होने का पल, उस प्रत्येक पल में रामनाम आना चाहिए। इस रामनाम की महत्ता कितनी कहें। रामनाम के बारे में एक कहा गया है, रामनाम से, नष्ट न हो, ऐसा पाप नहीं और रामनाम से उद्धारा ना जाए ऐसा पापी ना हुआ है, ना होगा, ऐसा है रामनाम। ‘सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने।’ सहस्त्र यानी अनंत...अनंत नामों की तुलना में भी, यह एक ही नाम सबसे श्रेष्ठ है, भारी है, वजनदार है। पर मुझे लगता है उससे भी भारी होती है हमारी जबान, क्योंकि इतना यह महत्त्वपूर्ण नाम है, उसे भी उच्चारने के लिए हमारी जबान उठती नहीं। बहुत परेशानी से सिर्फ ‘राम, राम, राम, राम, क्या उधम मचाया है बच्चों ने’ यह कहने के लिए सिर्फ हम राम को पुकारते हैं। तो क्या ये नाम इतना कठिन है उच्चारण के लिए मुझे बताइए? आसान है राम, और हमें आदर्श भी सिखाया है जिसने रामकथा लिखी उसीने कि, कैसे भी जपो, राम जपो, रमा जपो, मरा जपो, मार जपो, कैसे भी जपो पर यह तीन अक्षर उच्चारो, उच्चारो ‘र-आ-म’। बस हमारा कृत कल्याण हो, कोटी कल्याण हो। ऐसा है ‘राम’ नाम और ‘राम’ नाम का सर्वश्रेष्ठ मंत्र याने ‘रामरक्षा’।

॥ हरि: ॐ॥ श्रीराम॥ अंबज्ञ॥ नाथसंविध्‌॥

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